वास्तु शास्त्र
बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष निवारण: पंचतत्वीय ऊर्जा संतुलन के अचूक नियम
आचार्य दयानिधि मिश्र•२८ जनवरी २०२६•पठन समय: ६ मिनट
वास्तु शास्त्र का मूल आधार पांच महाभूत हैं—जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और आकाश। जब किसी भवन के किसी कोण में इन तत्वों का असंतुलन होता है, तभी मानसिक तनाव, आर्थिक संकट या स्वास्थ्य समस्याएं जन्म लेती हैं।
ईशान कोण (North-East) में भारी निर्माण या शौचालय होने पर जल तत्व दूषित होता है। इसे ताम्र व पीतल की ऊर्जा पट्टियों, विशिष्ट दिशा-शोधक यंत्रों तथा सात्विक रंगों से बिना किसी तोड़-फोड़ के संतुलित किया जा सकता है।
आग्नेय कोण (South-East) में अग्नि तत्व की शुद्धि के लिए लाल प्रकाश व मंगल यंत्र का प्रयोग चमत्कारिक परिणाम देता है।
श्री
आचार्य दयानिधि मिश्र
वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ, श्री निधि ज्योतिष कार्यालय, शिवपुर, वाराणसी।