वैदिक ज्योतिष
विवाह पूर्व कुंडली मिलान: केवल 36 गुण या सप्तम भाव का वैज्ञानिक परीक्षण?
आचार्य दयानिधि मिश्र•१० फरवरी २०२६•पठन समय: ५ मिनट
वैदिक परंपरा में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, अपितु दो कुलों और दो आत्मिक चेतनाओं का संगम माना गया है। वर्तमान समय में अधिकांश लोग केवल कंप्यूटर आधारित ३६ गुणों के संख्यात्मक मिलान पर निर्भर हो जाते हैं।
महर्षि पराशर के 'बृहत्पाराशर होराशास्त्र' के अनुसार, गुण मिलान के साथ-साथ सप्तम भाव (पति/पत्नी), द्वितीय भाव (कुटुंब), अष्टम भाव (मांगल्य व आयु) तथा नवमांश कुंडली (D9) की सूक्ष्म ग्रह स्थिति का परीक्षण अनिवार्य है।
यदि गुरु व शुक्र बलवान हों, लग्नेश व सप्तमेश में मैत्री हो, तो भकूट या नाड़ी दोष के परिहार शास्त्रीय रूप से स्वतः सिद्ध हो जाते हैं। अतः भयभीत होने के स्थान पर विद्वान ज्योतिषाचार्य से सूक्ष्म विश्लेषण करवाना चाहिए।
श्री
आचार्य दयानिधि मिश्र
वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ, श्री निधि ज्योतिष कार्यालय, शिवपुर, वाराणसी।